अंबे माता जी कौन हैं?
अंबे माता, जिन्हें अम्बा माता या मां दुर्गा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में शक्ति (स्त्री शक्ति) की प्रमुख देवी मानी जाती हैं। “अंबा” शब्द का अर्थ है मां। वे शक्ति की देवी हैं और असुरों के विनाश के लिए जन्मी थीं।
रूप और स्वरूप:
मां अंबे का स्वरूप अत्यंत भव्य, दिव्य और शक्तिशाली होता है।
उनके आठ या दस भुजाएं होती हैं, जिनमें वे विभिन्न अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं।
वे शेर या सिंह पर सवार रहती हैं, जो उनके साहस और पराक्रम का प्रतीक है।
उनके एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में तलवार, कमल, चक्र, डमरू, और अभय मुद्रा रहती है।
मुख्य कार्य और विशेषताएँ:
अधर्म और असुरों के नाश के लिए वे पृथ्वी पर अवतरित होती हैं।
उन्होंने महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ, और कई राक्षसों का वध किया था।
नवरात्रों में नौ रूपों में उनकी आराधना की जाती है – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
पूजा और महत्त्व:
मां अंबे की पूजा विशेष रूप से नवरात्रि में की जाती है।
भक्त व्रत, जागरण, और गरबा/डांडिया जैसे उत्सवों के माध्यम से उन्हें प्रसन्न करते हैं।
माना जाता है कि माता रानी की कृपा से शत्रु भय, रोग-दुख, और संकटों का नाश होता है।
मंत्र और जयकारा:
“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
जय माता दी! जय अंबे गौरी!
आरती संग्रह के लिए यहां क्लिक करें
आरती अम्बे माँ जी
जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत,हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत,टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना,चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी
कनक समान कलेवर,रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला,कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत,खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत,तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी
कानन कुण्डल शोभित,नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर,सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे,महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना,निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी
चण्ड-मुण्ड संहारे,शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे,सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणीतुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी,तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी
चौंसठ योगिनी मंगल गावत,नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा,अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता,तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता,सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी
भुजा चार अति शोभित,वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत,सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत,अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत,कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
श्री अम्बेजी की आरती,जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी,सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी





















